चेक बाउंस होने पर क्या कर सकते हैं...?
आदमी को सबसे ज्यादा डर अगर किसी बात का है, तो वो है धोखा... मौत से अधिक डर व्यक्ति को धोखे से लगता है... धोखा मानसिक हो सकता है, आर्थिक मामले में हो सकता है... कई बार तो धोखा शारीरिक नुकसान भी पहुंचा देता है... इन सबसे बचने के लिए व्यक्ति को समाज के विषय में अपडेट रहना चाहिए...!
व्यक्ति को चाहिए कि अपने आस पास के माहौल को ठीक से समझ लें... ताकि आम जन की मानसिक स्थिति को लेकर कोई कोई कन्फ्यूजन नहीं रहे...!
आर्थिक मामलों में सबसे अधिक धोखे होते हैं, इनमें चेक से संबंधित धोखा सबसे ज्यादा होता है...! एक बार विश्वास करके चेक स्वीकार कर लिया जाए तो हम धोखा खाने से बच नहीं सकते हैं... हमें चेक लेते समय ये पता नहीं होता है कि चेक देने वाले के खाते में पैसे है भी या नहीं...? अगर चेक बाउंस हो जाए तो हमारे पास क्या क्या उपाय है, उसी पर हम आज जानेंगे...!
चेक बाउंस होता कैसे है...?
मान लीजिए आपको किसी ने किसी पेमेंट के बदले चेक काट कर दिया, आप उस चेक को बैंक में कैश करवाने या अपने खाते में पैसे डलवाने गए, जिसने चेक जारी किया है उसके खाते में उतने पैसे ही नहीं है, या फिर चेक जारी कर्ता के साइन बैंक के रिकॉर्ड मैच नहीं होते, तो बैंक इस चेक को डिसओनर करके आपको लौटा देता है, या फिर चेक जारी कर्ता का बैंक अकाउंट फ्रीज हो रखा है तब भी बैंक इस चेक को डिसओनर कर देता है... यही स्थिति चेक बाउंस होना कहलाती है...!
चेक बाउंस होने पर क्या करें...?
चेक लौटाते समय बैंक साथ में एक स्लिप देता है, जिसपर लौटाने का कारण लिखा हुआ होता है... ये स्लिप आप अपने पास रख सकते हैं, जो आगे भविष्य में जरूरी दस्तावेज साबित होती है..! चेक बाउंस होने के 1 महीने के अंदर अंदर आपको जारीकर्ता को वकील की सहायता से एक कानूनी नोटिस भेजना चाहिए... कानूनी नोटिस के लिए वकील फीस 300 रुपए से 500 रुपए तक हो सकती है... कानूनी नोटिस में चेक बाउंस के मामले का विवरण होना चाहिए... जारी कर्ता पार्टी को आप पूरा पेमेंट करने के लिए बोल सकते हैं, जिसकी अधिकतम अवधि 15 दिन की होती है...!
15 दिन की अवधि बीत जाने के बाद भी अगर चेक जारी कर्ता पार्टी भुगतान नहीं करती है तो आप उसके लिए इंस्ट्रूमेंट एक्ट 1881 सेक्शन 138 के तहत सिविल कोर्ट में केस फाइल कर सकते हैं...! (सिविल कोर्ट में केस कैसे फाइल किया जाता है आप यहां से जान सकते हैं...!) केस शुरू होते ही आप एक एप्लीकेशन फाइल कर सकते हैं... जिसमें अपोजिट पार्टी से अपने पेमेंट का 20 या 30 प्रतिशत पेमेंट पहले ही मांग कर सकते हैं, जिसपर कोर्ट अपोजिट पार्टी को ये पेमेंट भुगतान करने का आदेश देगा...! ये राशि आप केस जीत जाते हैं तो आपको लौटानी नहीं होगी... और बाकी का पेमेंट आपको कोर्ट के जरिए मिलेगा...! केस हारने की स्थिति में आपको उस राशि को ब्याज सहित लौटाना होगा...! लेकिन चेक बाउंस मामले में चेक जारीकर्ता पार्टी बहुत रेयर मामलों में ही जीतती है...!
चेक बाउंस होने पर आप 1 महीने के बाद भी केस दर्ज करवा सकते हैं, लेकिन आपको देरी होने का उचित कारण बताना होगा...!
चेक जारी करते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए...?
- तारीख, उसी दिन की या आगे किसी भी तारीख डाली जा सकती है.
- साइन, तीन साइन करें तो बेहतर है, एक आगे और दो चेक के बैक साइड में.
- राशि, जितना भुगतान करना है, वो राशि भरकर आगे पेन से लाइन खींच देनी चाहिए.
- नाम, जिसको चेक दिया जा रहा है, उसका नाम भरकर आगे लाइन खींच देनी चाहिए
Cancel Cheque
कई बार अकाउंट वेरिफाई करने के लिए भी चेक लिए जाते हैं, जिसपर बड़े बड़े अक्षरों में Cancel लिखा जाना चाहिए और साइन नहीं करना चाहिए... ऐसे चेक सिर्फ अकाउंट वेरिफाई करने के लिए ही लिए जाते हैं...!
Security Cheque
लोन लेते समय कई पार्टियां एक खाली चेक लेती हैं, उसपर सिर्फ साइन ही करवाए जाते हैं, पार्टी का नाम और अमाउंट यानी राशि नहीं भरी जाती... ये चेक लोन वापस नहीं लौटाने पर भरकर बैंक में लगाया जाता है, जब लोन की राशि चुकाई नही जा रही है, ये चेक बाउंस होने पर जारी कर्ता के खिलाफ सिविल कोर्ट में केस फाइल किया जा सकता है.
एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि अगर किसी ने गिफ्ट या डोनेशन में चेक दिया है और वो बाउंस हो जाए तो केस फाइल नहीं किया जा सकता है.
ये थी चेक बाउंस होने पर क्या करना चाहिए, उसपर जानकारी... अच्छी लगे तो शेयर कीजिए और सुझाव के लिए आप कमेंट कर सकते हैं...

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